जी हाँ, नीच आतंकी संगठन ISIS ने अब एक नया पैंतरा खेलना शुरू किया है, जिसमें युवाओं के बाद अब मासूम बच्चों का माइंड वाश कर उन्हें, उनके ही पेरेंट्स की हत्या करने के लिए उकसाया जा रहा है। ISIS के आतंकी बच्चों को सिखा रहे हैं कि उन्हें अपने मां-पिता को ही मार देना चाहिए। इस खबर का खुलासा रक्का से भागकर निकले आईएस के ही एक `बाल सैनिक` ने किया है।
इस बाल सैनिक का नाम नासिर है जो कि सिर्फ 12 वर्षीय है। इस बच्चे ने प्रसिद्द मीडिया चैनल सीएनएन को बताया कि वह उन 60 बच्चों में शामिल था, जिन्हें आईएस ने रक्का में सूइसाइड बॉम्बर बनने के लिए ट्रेनिंग दी थी। नासिर ने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान आईएस के लड़ाके बच्चों को बताते थे कि उनके मां-पिता भी अमेरिकी लोगों की तरह ही मान्यताओं में यकीन नहीं रखते इसलिए पहला काम उन्हें ही जान से मार देना है। नासिर ने यह भी बताया कि, `जब हमें रक्का के अल फारूक इंस्टिट्यूट में सूइसाइड बॉम्बिंग मिशन की ट्रेनिंग के लिए ले जाया जाता था, तो सबसे छोटे बच्चों तक को रोके की इजाजत नहीं थी।` उसने बताया कि आईएस पांच साल तक के मासूम बच्चों को भी अपने मिशन के लिए तैयार कर रहा है। नासिर ने बताया, `हम लोगों के लिए सबसे खतरनाक पल हवाई हमलों का होता था। आतंकी छिपने के लिए हमें जमीन के नीचे बनी सुरंगों में ले जाते थे। उन्होंने हमें बताया कि अमेरिकी हमें मारने की कोशिश कर रहे हैं और सिपाही उन्हें प्यार करते हैं। उन्होंने हमसे कहा कि वे हमारे मां-पिता से भी बेहतर तरीके से हमारा ख्याल रखेंगे।
मालूम हो कि कुछ दिन पहले ISIS के ही एक आतंकी ने अपनी अम्मी के सर में गोली सिर्फ इसलिए मार दी थी क्यों कि वह उसे ISIS की बुराइयों से अवगत करना चाहती थी। उसी तर्ज पर अब बच्चों को भी उनके अभिवावकों के खिलाफ भड़काकर हिंसक बनाया जा रहा है।नासिर किसी तरह आईएस के चंगुल से भागने में कामयाब हो गया और एक रिफ्यूजी कैंप में अपने परिवार के पास पहुंच गया। उसने बताया, `भागने के बाद जब मैंने अपनी मां को दोबारा देखा, तब लगा मानो मुझे दोबारा जिंदगी मिल गई है।` बाल सैनिकों का प्रयोग नया नहीं है, कुछ समय पूर्व यूनीसेफ के प्रवक्ता क्रिस्टोफ बोलिराक ने बताया था कि दक्षिणी सूडान में सक्रिय सशस्त्र गुट युद्ध के लिए 16000 बच्चों को सैनिकों के रूप में प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बच्चे मारे जाते हैं, इनका अपहरण कर लिया जाता है और इनका यौन शोषण भी होता है। यूनीसेफ के प्रवक्ता ने बताया कि इन बाल सैनिकों में से कुछ को अग्रिम मोर्चे पर भेजा जाता है जबकि अन्य बच्चों को ख़तरनाक परिस्थितियों में संदेशवाहक के रूप में या सामान ढोने के लिए प्रयोग किया जाता है।
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