क्यों मनाते हैं महाशिवरात्रि? पूजन विधि, मन्त्र, मुहूर्त, प्रमुख भोग
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फटाफट समाचार की तरफ से आपके लिए महाशिवरात्रि के इस महापर्व के अवसर पर विशेष प्रस्तुति...

 

क्यों मनाते हैं महाशिवरात्रि

देवों के देव महादेव की उपासना के लिए महाशिवरात्रि अपने आप में खास त्यौहार है। फाल्गुन महीने के कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। वैदिक कथाओं के अनुसार इसी दिन भगवन शिव का रूद्र रूप में अवतरण हुआ था। ऐसा माना जाता है कि आज के दिन शिव जी का अंश संसार के सभी शिवलिंग में उपस्थित रहता है।

प्रत्येक वर्ष में भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों को समर्पित एक-एक शिवरात्रि का पर्व होता है और बारहवीं शिवरात्रि को महाशिवरात्रि के तौर पे मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार 24-25 फरवरी को पड़ने वाली यह शिवरात्रि विक्रमी संवत की बारहवीं अर्थात महाशिवरात्रि है ।

पूजन विधि

आइये जानते हैं महाशिवरात्रि में भगवान शिव की उपासना की विधियां..

सर्वप्रथम मुहूर्त के अनुसार वर्णित समय पर घर के पूर्वी हिस्से में स्वच्छ जगह को चुनकर वहां पर गंगाजल का छिडकाव करके शिवलिंग स्थापित करते हैं। तत्पश्चात शिवलिंग का गंगाजल और दूध से आचमन करते हैं। इसके बाद भांग, धतूरे के फल और गन्ने के छोटे टुकड़े और बेलपत्र का भोग लगाकर निचे लिखे मन्त्र का जाप करते हैं

 

पूजन के लिए मन्त्र

नमो बिल्ल्मिने च कवचिने च नमो वर्म्मिणे च वरूथिने च

नमः श्रुताय च श्रुतसेनाय च नमो दुन्दुब्भ्याय चा हनन्न्याय च नमो घृश्णवे॥ 

दर्शनं बिल्वपत्रस्य स्पर्शनम्‌ पापनाशनम्‌। अघोर पाप संहारं बिल्व पत्रं शिवार्पणम्‌॥

त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुधम्‌। त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्‌॥

अखण्डै बिल्वपत्रैश्च पूजये शिव शंकरम्‌। कोटिकन्या महादानं बिल्व पत्रं शिवार्पणम्‌॥

गृहाण बिल्व पत्राणि सपुश्पाणि महेश्वर। सुगन्धीनि भवानीश शिवत्वंकुसुम प्रिय।

 

 

भक्तों द्वारा आज के दिन रात्रि जागरण और शिवपुराण का पाठ करने की प्रथा भी प्रचलित है।

पूजा का मुहूर्त

इस महाशिवरात्रि चारो पहरों की पूजा होगी, पहला प्रहर सूर्यास्त संध्या समय 6.30 बजे, दूसरा पहर रात 9.41 बजे, तीसरा प्रहर रात 12.51 बजे एवं चौथा प्रहर तारों की छांव में चार बजे से सूर्योदय तक रहेगा। 24 फरवरी शुक्रवार को निशीथ कालरात्रि 12.14 बजे से 01.04 मिनट तक अत्यंत शुभ है। ज्योतिष विद्वानों का कहना है 24 फरवरी को चतुर्दशी तिथि निशीथ व्यापिनी है। रात्रि 9.30 बजे चतुर्दशी तिथि का शुभआरंभ होगा। जिसका प्रभाव 25 फरवरी की रात्रि 9.10 बजे तक रहेगा। 24 की रात्रि निशीथ काल 12.10 से लेकर 1.03 बजे तक रहेगा। पारण का समय 25 फरवरी 06:54 से 15:24 तक रहेगा।

 

भगवान शिव को चढ़ाये जाने वाले पांच प्रमुख भोग

 

 

फटाफट समाचार की तरफ से आपको और आपके परिवार को महाशिवरात्रि की ढेर सारी शुभकामनायें, भगवान शिव आप सभी को सुख-समृद्धि प्रदान करें।

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