कभी कभी प्यार के सफर में, जब मुहब्बत मुश्किल हो जाती है, और रास्ते अलग हो जाते हैं, तब जीवन एक दम से बदल जाता है ,हम सब इस स्थिति से कभी न कभी गुज़रते हैं । जब आपका साथी आपको ठेस पहुंचता है और रिश्ता टूटता है तो उस वक़्त भावनाओं के जाल में आप ऐसे उलझे होते हैं कि खुद को मजबूत कर पाना कठिन लगता है । मगर और भी कठिन हालात तब हो जाते हैं जब वो बार बार आपसे मिलने की कोशिश करता है, ऐसे में घर से निकलना और ठीक से कैरियर में मन लगा पाना बहुत मुश्किल हो जाता है | यूं तो वक़्त के साथ कर जख्म भरने लगते हैं, मगर तब क्या करें जब कोई उन जख्मों को भरने ही ना दे ? आइये तो हम आज जानते हैं कि कैसे अपने एक्स पार्टनर से खुद को आज़ाद करें :-

आपका उससे खुद को बचाना उसके इरादे और मज़बूत कर देगा, इसलिए वो हर बार और कॉन्फिडेंस से कोशिश करेगा, इसलिए आप अपने को सामान्य रखें | चाहे रास्ते में मिले या चैटिंग पे आप चाहें तो इग्नोर करते रह सकते हैं मगर ये आपको ही मानसिक कष्ट देगा, इसलिए अच्छा है एक बार साफ़ साफ बात कर ली जाए | ध्यान रहे यदि आपकी बात चीत का जरिया सोशल साइट्स से है तो ब्लॉक वगैरह करने से बचें, क्यों कि इस स्थिति में जुनूनी प्रेमी आपकी फ्रेंडलिस्ट में जरिया तलाशने लगते हैं | यदि पूर्व साथी समझदार था तो ब्लॉक करने में कोई हर्ज़ नहीं है|

जहां तक संभव हो अकेले न रहें किसी एक तेज तर्रार दोस्त को साथ रखें | शोध के अनुसार पूर्व साथी आपके नए साथी के सामने आने से बचता है, तो भले नया साथी प्रेमी हो न हो मगर किसी ऐसे को साथ रखें जो आपको कमज़ोर न पड़ने दे |

आप अपनी बात साफ़ तरह से कहें, कोई भी उलझन /संशय न रहने दें | बात ऐसे करें कि जैसे आप आखिरी बार उससे बात कर रहे हैं , उग्र होने से बचें | दोस्ती के बारे में न सोचें क्यों कि ऐसे मामलों में फिर से बस दोस्ती रहना संभव नहीं होती |

आप ये तय कर लें कि आपने जो अलग होने का फैसला लिया है उसपे आपको बने रहना है, किसी भी सूरत में पैच अप नहीं करना है | चाहे शब्द कितने भी लें मगर अपनी तरफ से उसे स्पष्ट कर दें कि आपने उसके बारे में सोचना बंद कर दिया है तो अब दोनों को अपने अपने करियर पे फोकस करना चाहिए |

इस तरह की मीट के दौरान आप सिर्फ अपनी बात कहें, और उसी पर फोकस रहें | उसका तर्क सुनें भले मगर उस पर न को कोई सफाई दें और न ही कोई शर्तें बनाएं | बस अपना पक्ष रखें और साफ़ कहें कि आप अपने जीवन में उसका कोई दखल नहीं चाहते |

आपके अलग होने के जो भी कारण थे, उन पर किसी तरह का कोई समझौता न करें, हो सके तो उन कारणों का जिक्र भी न करें, वर्ना कुछ लोग इतने चालक होते हैं कि इस तरह की मीट में भी समझौते की गुंजाइश में आपको उलझा सकते हैं |

यदि साफ़ तौर पर कही हुई बात को भी वो नहीं मानता है और निरंतर आपके जीवन में दखल देता है तो आप अपने परिवार को विशवास में लेकर , उसका विरोध कर सकते हैं, हो सकता है परिवार आपको डांटे मगर आपको मानसिक रूप से शान्ति दिलवाने में अहम भूमिका अदा कर सकता है इसलिए परिवार से बचें नहीं उसे अपना साथी समझें

कुछ लोग अत्यंत दुष्ट प्रवत्ति के होते हैं जो न सिर्फ मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं बल्कि धमकियां आदि भी देते हैं , ऐसे में आप अपने परिवार को साथ लेकर कानूनी कार्यवाही भी कर सकते हैं |
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